क्या हम पीरियड्स में नवरात्रि का व्रत कर सकते हैं?

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नवरात्रि के दौरान 9 दिनों में कई श्रद्धालु माता को घर में भी स्थापित करते हैं। जगह-जगह पंडाल लगाए जाते हैं जिनमें माता दुर्गा की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाती है। महिलाओं के लिए ये पर्व बेहद खास होता है लेकिन इन 9 दिनों के दौरान यदि किसी महिला का मासिक धर्म पड़ जाए तो क्या वो व्रत और पूजा कर पाएगी ये सवाल सभी के मन में होता है। कई लोग सीधे तौर पर इसे अशुभ मानते हैं और व्रत और पूजा से दूर रहते हैं लेकिन कई लोग इसका परहेज नहीं करते।

इस प्रश्न के उत्तर के लिए एक बात समझना बेहद जरूरी है और वो है पूजन और उपासना का अर्थ और प्रकार। मनुष्य जब परमात्मा का अभिवादन करता है तो उसे पूजा कहा जाता है लेकिन उपासना इससे भिन्न है। इसका संधि विच्छेद है उप-आसना अर्थात् स्वयं के समक्ष वास करना। आध्यात्मिक रूप से यदि देखा जाए तो इसके अनुसार प्रभु का वास स्वयं में ही होता है।

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पूजा के दो रूप हैं एक स्थूल पूजन और दूसरा भाव पूजन। स्थूल पूजन में कई उपचार किए जाते हैं। इसमें प्रभु की सूक्ष्म उपस्थिति को मानकर श्रद्धा भाव के साथ पूजा की जाती है। स्नान, अर्घ्य, वस्त्र, श्रृंगार, नैवेद्य, सुगंध इत्यादि से ईश्वर का अभिनंदन करते हैं। इसके पश्चात स्तुति, प्रार्थना, निवेदन, मंत्र, आरती और भजन के द्वारा भगवान की कृपा की कामना करते हैं।

क्या हम पीरियड्स में नवरात्रि का व्रत कर सकते हैं?

अगर नवरात्र में आपको period है या उसकी शुरुआत हो चुकी है तो आपको व्रत नहीं करने चाहिए। दूसरी पूजा भाव पूजन है जो कि भावनाओं के द्वारा किया जाता है। इसमें किसी भी स्थिति में प्रभु का ध्यान, चिंतन, उनका स्मरण या मानसिक जाप कर सकते हैं।

मासिक धर्म की जहां तक बात है ऐसे समय में स्थूल पूजन नहीं करना चाहिए यानि मूर्ति पूजन, देव प्रतिमा का स्पर्श, मंदिर या धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं होना चाहिए। इस दौरान व्रत रखकर मानसिक जप और पूजन करने में कोई मनाही नहीं है। यदि नवरात्रि के दौरान किसी महिला को पीरियड्स से गुजरना पड़े तो वो व्रत रखकर बिना मूर्ति पूजन सिर्फ मन का जाप कर माता रानी की आराधना कर सकती है।

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