नवरात्रि के बाद कलश नारियल का क्या करें?-2022

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हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ काम में नारियल का इस्तेमाल जरूर किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि नारियल के बिना पूजा अधूरी होती है। जब बात कलश में नारियल रखने की हो तो ज्योतिष में इसका बहुत ज्यादा महत्व बताया गया है।

पूजा के समय कलश स्थापना एक मुख्य चरण होता है और इसके द्वारा देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है जिससे हम जो भी काम करने जा रहे हैं उसमें सफलता मिले। ज्योतिष के अनुसार जिस कलश में नारियल न रखा गया हो उसमें ईश्वर का वास नहीं हो सकता है और ऐसे पूजन को भी पूर्ण नहीं माना जाता है।

नवरात्रि के बाद कलश नारियल का क्या करें?-2022

खासतौर पर नवरात्रि पूजन के दौरान कलश स्थापना का विधान है। आइए नारद संचार के ज्योतिष अनिल जैन जी से जानें कलश स्थापना के समय उसमें नारियल रखने के कारणों और इसके ज्योतिषीय महत्व के बारे में।

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आमतौर पर जब हम घर पर खानाबदोश, व्रत और पूजा करते हैं तो कलश पर नारियल रखकर पूजा करते हैं। तांबे या चांदी का कलश लें और हल्दी और कुकुम से सजाएं।

नवरात्रि के बाद कलश नारियल को किसी भी नदी या कुए में ससम्मान डाल देना चाहिए।

कलश में थोडा़ सा पानी डालकर हल्दी, कुमकुम, चंदन और फूल डालें। कलश के चारों ओर आम के पत्ते रखें और उनके ऊपर नारियल रखें। नारियल के चारों ओर एक कपड़ा लपेटा जाता है। संदेह होना स्वाभाविक है कि क्या किया जाए। पूजा समाप्त होने के बाद कलश पर रखे नारियल से करें।

हम उस नारियल को पास के किसी जलाशय में विसर्जित कर सकते हैं या हम इसे ब्राह्मणों को खानाबदोश-व्रतों के दौरान दे सकते हैं, विद्वानों का कहना है कि इस तरह देने में कुछ भी गलत नहीं है। मंदिरों में, इस कलश के लिए उपयोग किए जाने वाले नारियल का उपयोग किया जाता है।

ऐसी मान्यता है कि नारियल ही एक ऐसा फल है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों देवताओं का वास होता है। यही वजह है कि नारियल को किसी भी शुभ काम में जरूर रखा जाता है। इस फल को भगवान शिव का भी पसंदीदा फल माना जाता है और इसमें दिखने वाले तीन बिंदु शिव जी के तीनों नेत्रों को प्रदर्शित करते हैं।

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